हिमालय की गोद मे फूलो की खूबसूरती अगर आप यहाँ नही गये तो फिर आपने कुछ नही देखा....!!!

नमस्कार दोस्तो, अगर आप भी इन गर्मियों की छुट्टियों में कही घूमने की योजना बना रहे हैं, तो ये आपके लिये बेस्ट ऑप्शन है। मैं आज आपको एक ऐसी जगह के बारे में बताना चाहूँगा, जिसके बारे में सुनकर आपका मन वहाँ जाने के लिये बेचैन हो उठेगा।।

जी हाँ दोस्तो में बात कर रहा हूँ, फूलो की घाटी राष्ट्रीय पार्क की!!!



यह एक ऐसी जगह है इसके बारे मे जानने के बाद आप एक बार तो आप यहाँ जाना जरूर चाहेंगे। क्योकी यह एक ऐसी जगह है जो हर इंसान को मंत्र मुग्ध कर देती है, ओर वह अपना अनुभव पूरी लाइफ में कभी नही भूल पाता है।

दोस्तो सोच कर देखिये आप की नजर जहा भी जाये दूर दूर तक बेहद खूबसूरत फूलो से लदी वादी हो तो कैसा लगेगा....सच मे इस जगह को देख कर आपको प्रकृति से प्यार हो जायेगा, और आपका मन इस जगह को कभी छोड़कर जाने का नही करेगा।



दोस्तो उत्तराखंड के चमोली जनपद के उच्च हिमालयी  छेत्र में समुद्रतल से 3962 मीटर की ऊंचाई पर स्थित 87.5 वर्ग किलोमीटर छेत्र में फैली यह घाटी कुदरत का बेजोड़ नमूना है। यह वही घाटी है, जिसका ज़िक्र रामायण और महाभारत में नंदकानन के नाम से हुआ है, लेकिन वर्तमान में इस घाटी का पता सबसे पहले वर्ष 1931 में ब्रिटिश पर्वतारोही फ्रैंक एस. स्मिथ और उनके साथी आरएल होल्डस्वर्थ ने लगाया। इसकी बेइंतहा खूबसूरती से प्रभावित होकर स्मिथ 1937 में दुबारा घाटी में आये और 1938 में 'वैली ऑफ फ्लावर्स' नाम से एक किताब प्रकाशित करवाई। वर्ष 1982 में फूलों की घाटी को राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया। हिमाच्छादित पर्वत से घिरी ये घाटी हर साल बर्फ पिघलने के बाद खुद-बखुद बेशुमार फूलों से भर जाती है।



यूनेस्को की धरोहर!!!

दोस्तो वर्ष 2005 में यूनेस्को ने फूलो की घाटी को विश्व धरोहर का दर्जा दिया था।

फूलो की घाटी में 500 से अधिक प्रजातियों के फुल खिलते है, ओर इससे भी बड़ी बात यह है की इन सभी फूलो का रंग हर 15 दिन में बदलता रहता है और ये जादुई पल जो वहाँ जाता है उसके लाइफ के यादगार पलो में शामिल हो जाते है।

कब घूमने जा सकते है!!!

घाटी में घूमने के लिये सबसे अच्छे दिन अगस्त ओर सितंबर है क्योकी सितंबर में यहाँ ब्रह्मकमल खिलते है जो बहुत ही खूबसूरत होते है,
ओर इस तो साल आपको यहाँ 1 जुलाई से एंट्री मिल जायेगी।


कैसे पहुँचे!!!

फूलों की घाटी पहुंचने के लिए चमोली जिले का अंतिम बस अड्डा गोविंदघाट तीर्थनगरी ऋषिकेश से 275 किलोमीटर की दूरी पर है, जो कि जोशीमठ-बद्रीनाथ के मध्य पड़ता है। आप ऋषिकेश तक ट्रैन से भी पहुंच सकते है। जबकि इसका नज़दीकी एयरपोर्ट ऋषिकेश के पास जोलीग्रांट (देहरादून) में है। गोविंदघाट से फूलो की घाटी के के प्रवेश स्थल घांघरिया की दूरी 13 किलोमीटर है। यहां से आप तीन किलोमीटर लंबी व आधा किलोमीटर चौड़ी फूलो की घाटी का दीदार कर सकते है।

जोशीमठ से गोविंदघाट की दूरी 19 किलोमीटर है।

एंट्री कैसे होगी क्या चार्ज लगेंगे!!!

आप अगर भारत से हो तो आपके पास आधार कार्ड होना चाहिये, और अगर विदेशी नागरिक हो तो वहाँ का id card आपके पास होना चाहिये, बाकी इसके अलावा कुछ शुल्क देना पड़ेगा जो नीचे पिक्चर में आपको पता चल जायेगा, वैसे उद्यान प्रशासन अपनी मर्जी से इस शुल्क को कम अथवा ज्यादा कर सकता है।



कुछ सावधानियां ओर नियम!!!

1. प्लास्टिक ओर पालीथिन का प्रयोग पूर्णतः वर्जिय है अगर आप वहाँ उपयोग करोगे तो आप पर जुर्माना भी लग सकता है।

2. यहाँ पर अगर आप गंदगी फैलाते पकडे गये तो आपको सजा भी मिल सकती है और आपको जुर्माना तो भरना ही पडेगा।

3. यहाँ पर फूल तोड़ना मना है ऐसा करने पर आपको जुर्माना भुगतना पडेगा।


तो दोस्तो कैसी लगी हमारी आज की पोस्ट कमेंट करके जरूर बताइयेगा। बहुत जल्द फिर मिलेंगे ऐसे ही ओर मज़ेदार पोस्ट के साथ..!!!
अगर आप भी किसी जगह के बारे में विस्तार से जानना चाहते है तो आप हमे मेल कर सकते है..!!!
Email id - apnipaltan007@gmail.com

Thank You
BY_Team_apnipaltan

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